तुलसीदास जी का जीवन परिचय | Biography of Tulsidas in Hindi | HindiApni
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तुलसीदास जी का जीवन परिचय | Biography of Tulsidas in Hindi

Biography of Tulsidas in Hindi

Biography of Tulsidas in Hindi
तुलसीदास जी का जीवन परिचय

महान कवि तुलसीदास की रचनाओं से समस्त संसार आलोकित हो रहा हैं। लेकिन इस कवि का जन्म का समय विवादों से भरा हैं। इनका जन्म का समय अलग – अलग दिया गया हैं।

पूरा नाम – गोस्वामी तुलसीदास

जन्म      –   सवंत 1589

पिता       –   आत्माराम

माता       –   हुलसी

शिक्षा       –   बचपन से ही वेद, पुराण एवं उपनिषदों की शिक्षा मिली थी।

विवाह      –   रत्नावली के साथ।

मृत्यु        –   1623 ( संवत 1680 )

गोस्वामी तुलसीदास के जन्म के समय ही उनके पुरे दांत थे। उनके माता – पिता इसको अशुभ मान कर उन्हें त्याग दिए। गोस्वामी तुलसीदास का पालन पोषण नरहरी दास ने किया। तुलसीदास का जन्म बाँदा जिले के यमुना के तट पर स्थित राजापुर गावं में हुआ था। कुछ लोग इनका जन्म सुकर क्षेत्र और सोरों (एटा) में मानते हैं।

रामनरेश त्रिपाठी का निष्कर्ष हैं की तुलसीदास का जन्म सोरों में ही हुआ हैं। सोरों में तुलसीदास का के स्थान का अवशेष, तुलसीदास के भाई नंददास के उतराधिकारी नरसिंह जी का मंदिर हैं। तुलसीदास किस वंश के थे या किस जाती के थे। इसका भी कही स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला हैं। कवितावली एवं विनयपत्रिका के अनुसार प्रतीत होता हैं की वह ब्राह्मण कुल के थे।

राजापुर में मिले तथ्यों के अनुशार वह कन्य्कुज ब्राह्मण थे। जबकि सोरों से मिले तथ्यों के अनुशार वह सना ब्राह्मण होने का प्रमाण मिलता हैं। लेकिन “ दियो सुकुल जनम सरीर सुंदर हेतु जो फल चारि को” इसके अधार पर उन्हें शुक्ल ब्राह्मण होने का प्रमाण मिलता हैं।

तुलसीदास का जन्म एक निर्धन ब्राह्मण परिवार में हुआ था। माँ – बाप का छाया भी सर से उठ जाने के बाद तुलसीदास को भिक्षाटन के लिए विवश होना पड़ा। तुलसीदास के माता – पिता के बारे में कोई ठोस साबुत नहीं हैं। कुछ प्राप्त जानकरी के अनुसार उने पिता का नाम आत्माराम दुबे था। लेकिन भविष्यपुराण के अनुशार उनके पिता का नाम श्रीधर बताया गया हैं। उनके माता का नाम हुलसी बताया गया हैं।

Tulsidas ki Jivani in Hindi

तुलसीदास के गुरु के रूप में अनेक नाम लिया जाता हैं। भविष्यपुराण के अनुशार राघवानंद, विलसन के अनुसार जगनाथदस सोरों से प्राप्त तथ्यों के अनुसार नरसिंह चौधरी तथा अत्स्क्षीय के अनुसार नरहरी दास तुलसीदास के गुरु थे।

तुलसीदास के माता – पिता की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। वह काफी दरिद्र थे। वे भिक्षा मांग कर अपनी जिविका चलाते थे। तुलसीदास का यज्ञोपवित संस्कार कुछ ब्राह्मण के मिलकर सरयू के तट पर कर दिया था।

तुलसीदास ने अपनी जीवन का ज्यादातर समय वाराणसी में ही बिताया। गंगा नदी का तुलसी घाट उन्ही के नाम पर रखा गया था। उन्होंने वाराणसी में संकटमोचन मन्दिर का निर्माण करवाया था। जो हनुमान मंदिर हैं। लोगो का मानना हैं की तुलसीदास ने इसी जगह पर भगवान हनुमान का दर्शन किया था। तुलसीदास ने ही रामलीला के नाटक की शुरुआत की थी।

तुलसीदास के रचित 12 रचनाएँ काफी लोकप्रिय हैं। जिनमे 6 मुख्य रचनाये एवं 6 छोटी रचनाये हैं। भाषा के आधार पर इन्हें दो भागो में बाटा गया हैं।

अवधी – रामचरितमानस, रामलाल नहछू, बरवाई रामायण, पार्वती मंगल, जानकी मंगल और रामाज्ञा प्रश्न।

ब्रज  – कृष्णा गीतावली, गीतावली, साहित्य रत्न, दोहावली, वैराग्य संदीपनी और विनय पत्रिका।

इन 12 रचनाओं के आलावा और तुलसीदास द्वारा रचित चार रचनाएँ काफी प्रशिद्ध हुई हैं जिनमे हनुमान चलीसा, हनुमान अष्ठक, हनुमान बहुक और तुलसी सतसाई शामिल है।

ग्रंथ सम्पति:-

रामचरितमानस
रामलीला नहछु
वैराग्य संदीपनि
बरवै रामायण
पार्वती मंगल
जानकी मंगल
रामाज्ञा
दोहावली
कवितावली
गीतावली
कृष्ण गीतावली
विनयपत्रिका
एवं ‘हनुमान चालीसा’ आदी।

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