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निरंतर प्रयोग से मिली सफलता | Motivational Story In Hindi

Successful Entrepreneurs Stories in Hindi

Success Businessman Story in Hindi
बुलंद होसलों की कहानी

आपके भीतर अगर जूनून हैं तो रास्ते तय करने के लिए जज्बा भी साथ चलता हैं। यह कहानी हैं मेरठ के स्टैनफोर्ड क्रिकेट इंडस्ट्रीज के सीईओ अनिल सरीन की जो क्रिकेट इंडस्ट्री में इनोवेसन के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं। शायद ही कोई स्टार क्रिकेटर हो जो SF ब्राण्ड से परिचित न हो। आज यह समय और जरूरत के हिसाब से क्रिकेट के सामान को तैयार करते हैं। पिछले 20 वर्ष में सरीन ने क्रिकेट की दुनिया को समझा और वह सब कुछ दिया जो आज तक इंग्लेंड की क्रिकेट इंडस्ट्री ने पूरा नहीं कर पाई थी।

अनिल शुरु में अपने बड़े भाई की कम्पनी में काम करते थे। और उन्हें 6,000 रूपये वेतन मिलता था। अनिल की शादी हुई तो जिम्मेदारी बढ़ी उन्होंने अपना काम करने की जोखिम उठाया। अनिल बताते हैं की मैंने अपनी पत्नी रीमा से कहा की हर हल में 5000 रूपये तो कमा ही लूँगा। क्या तुम इसमें गुजरा कर सकती हो। तो पत्नी के हां कहने पर उन्होंने अपनी फैक्ट्री की शुरआत की। और सबसे पहले उन्होंने SF ब्राण्ड की गेंद बनानी शुरू की सरीन को गेंद बनाने में महारत हाशिल थी। तब हैंडमेड लेदर गेंद आती थी। उन्होंने पहला बदलाव इसी मायने में किया। वे गेंद का लेदर कप तैयार करने के लिए हाईड्रोलिक मशीन ले आये। और इसके लिए कई रिसर्च किया। गेंद के भीतर डाले जाने वाला गोला कॉर्क का होता था। जिसपर धागे लपटे जाते थे। नतीजा बहुत अच्छा था जो गेंद 10 ओवर में ख़राब हो जाती थी ‘डिशेप’ हो जाती थी अब वह 100 ओवर में भी नहीं होती हैं।

अनिल बताते हैं की मैं इंग्लेंड गया। क्रिकेट के मशहुर कारोबारी डूयूक्स क्रिकेट कम्पनी के बाहर गार्डन में बैठे रहते थे। दस दिन बाद जब डूयूक्स क्रिकेट कम्पनी के मालिक दिलीप झिंझोरिया से मुलाकात हुई तो उन्होंने गेंद निर्यात के लिए 20 लाख का आर्डर दे दिया। लेकिन जब सरीन ने कहा की हमारी इतनी हैसियत नहीं हैं। तो इस जवाब से झिंझोरिया खुश हुए और 5 – 5 लाख रूपये के आर्डर दे दिया।

2004 में SF ने अनिल कुंबले को पहले क्रिकेटर के रूप में साइन किया। इसके बाद मोहित शर्मा और श्रीलंका के अरविदं डी सिल्वा से कम्पनी ने करार किया। अनिल एक सचिन तेंदुलकर से जुड़े किस्सा सुनाते हैं। सचिन को मैंने 8-10 बैट बनाकर दी लेकिन उन्होंने सभी बैट में कुछ न कुछ कमी निकाल दी। फिर मुझे कुछ नया करने की प्रेरणा मिली। 2013 में आईपीएल के दौरान सचिन जिस होटल में ठहरे थे मैंने उस होटल में चार बैट और कारीगर साथ ले कर गए। और वही सचिन के अनुसार बैट को सवांरने शुरू कर दिए फिर सचिन को चारो बैट पसंद आये।

अनिल ने 25 कर्मचारियों से अपनी कारोबार की शुरुआत की थी। आज उनकी कम्पनी में 200 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं। तीन लाख से शुरू हुई कम्पनी आज 10 करोड़ की हो गई हैं। कम्पनी का सालाना कारोबार 40 करोड़ से ज्यादा का हैं।

आज इस कम्पनी में रोज 700 गेंद और 250 बैट बनाये जाते हैं। स्टैनफोर्ड बैट की कीमत 4,000 रूपये से लेकर 40,000 रूपये तक हैं। और गेंद की कीमत 250 रूपये से 1,500 रुपए तक हैं।

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