नया जज्बा – नई मंजिल – महेश गुप्ता | Success Businessman Story in Hindi | HindiApni
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नया जज्बा – नई मंजिल – महेश गुप्ता | Success Businessman Story in Hindi

Success Businessman Story in Hindi

Success Stories of Indian Entrepreneurs in Hindi
शुद्धता को समर्पित आरओ वाटर प्यूरीफायर

महेश गुप्ता 1998 में अपनी पत्नी और बच्चों के साथ दिल्ली के साऊथ एक्सटेंसन जैसी पॉश कॉलोनी में रहते थे। यह दिल्ली के सबसे महंगे इलाको में शुमार होने के बावजूद वहा पानी की काफी किल्लत थी। लोग स्वस्थ के लिए हानिकारक पिने का पानी की सप्लाई से काफी परेशान थे। महेश के बच्चे बीमार रहने लगे। उन्होंने बाजार में कई वाटर प्यूरीफायर के बारे में जानकारी इकठा की लेकिन पानी को पूरी तरह साफ करने में कोई भी वाटर प्यूरीफायर कारगर नहीं था। महेश गुप्ता पेशे से इंनजीनियर थे उन्होंने काफी रिसर्च के बाद पता लगया की रिवर्स आसमोसिस (आरओ) तकनीक खारे पानी की अशुद्धियो को पूरी तरह दूर करने में कारगर हैं। तो कुछ महीनो में अपने घर के लिए महेश ने आरओ तकनीक से युक्त वाटर प्यूरीफायर बना डाला। इसने घर में आने वाले खारे पानी को मीठा बना डाला। यही से उत्साहित होकर रमेश ने आरओ तकनीक वाटर प्यूरीफायर निर्माण के क्षेत्र में कदम रखने का मन बना लिया। यही से देश में आरओ तकनीक वाले पहले वाटर प्यूरीफायर की नीव पड़ी। और यही से केंट वाटर प्यूरीफायर बाजार में आया।

महेश गुप्ता आई आई टी कानपूर से 1975 में मैकेनिकल इंजिनयरिंग की पढाई पूरी करने के साथ ही इंडियन आयल मुम्बई में नौकरी कर ली। महेश गुप्ता को नौकरी में बंधकर रहना रास नहीं आ रहा था। ग्यारह वर्ष बाद 1988 में महेश गुप्ता ने नौकरी की बंधन से खुद को मुक्त कर लिया। इसी वर्ष नोएडा में एक कम्पनी एस एस इंजीनिरिंग इंडस्ट्री बनाई। इस कम्पनी के जरिये महेश ने लुब्रिकेट आयल को जांचने का उपकरण और आयल फ्लोमीटर बनाना शुरु किया। एस एस इंजीनियरिंग आयल फ्लोमीटर बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कम्पनी बन गई। हालंकि महेश गुप्ता को पहचान तब मिली जब उन्होंने केंट आरओ सिस्टम लिमटेड नाम से कम्पनी बनाई। और जब उनका आरओ सिस्टम 1999 में बाजार में आ गया।

महेश बताते हैं की बाजार में साधारण वाटर प्यूरीफायर की कीमत 1999 में 4 से 5 हज़ार थी। लेकिन केंट आरओ की कीमत 20,000 रूपये थी। इस लिए शरुआती दौर में लोगो की दिलचस्पी इसको खरीदने में ज्यादा नही थी।

Success Businessman Story in Hindi

आलम यह था की शुरुआती कुछ सालो में केंट आरओ के 500 पीस भी एक वर्ष में नहीं बिक पाते थे। इसको देखते हुए महेश गुप्ता ने अपनी ही कम्पनी में वाटर प्यूरीफायर में लगने वाले उपकरण बनाने लगे इससे लागत में कुछ कमी आई। और इसके बाद उन्हने आपनी केंट आरओ छह वर्ष बाद 2005 में ब्रांडिंग करने की सोची। उनके दोस्तों ने हेमा मालिनी से प्रचार कराने की सलाह दी। महेश बताते हैं की मैं जब अपने वाटर प्यूरीफायर के प्रचार करने के लिए हेमा मालिनी के पास गया तो उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने कहा की जिस प्रोडक्ट का मैंने कभी इस्तमाल नहीं किया उसका मैं प्रचार कैसे कर सकती हूँ। तब हमने उनके घर पर अपनी कम्पनी का वाटर प्यूरीफायर लगाया। कुछ महीनो बाद इस वाटर प्यूरीफायर से प्रभावित हुई और प्रचार करने के लिए राजी हो गई। यह कम्पनी के लिए टर्निंग पॉइंट था। क्यों की इसके बाद हमारा कारोबार 20 प्रतिशत की दर से प्रति वर्ष बढ़ने लगा।

पहले आरओ वाटर प्यूरीफायर पानी के अशुद्धियो के साथ मिनरल भी साफ कर देता था। अब ऐसी तकनिकी लगाई गई जिससे इनमे मिनरल बची रहे। पानी की बचत को भी बढाया गया।

वाटर प्यूरीफायर के क्षेत्र में डंका बजाने के बाद केंट आरओ ने दुसरे नए उपकरण बाजार में उतारे उसने 2014 में ओजोन तकनीक पर आधारित सब्जियों को धोने की मसीन बनाई। जो सब्जियों में लगे हानिकारक केमिकल को हटाने में कारगर हैं। कम्पनी ने 2016 में एफिसिएंसी पार्टीकुलेट एयर तकनीक पर देश का पहला एयर प्यूरीफायर बनाया। यह प्यूरीफायर न केवल प्रदूषण के महीन कण हटाने में सक्षम हैं; बल्कि यह भी बता सकता हैं की कमरे में प्रदुषण का स्तर कितना हैं।

महेश हर वर्ष 5 लाख वाटर प्यूरीफायर बनाते हैं। और इसे जल्द ही दुगना करने की मुहीम में जुट चुके हैं। 20,000 रूपये से शुरु हुई कम्पनी आज 800 करोड़ से अधिक का टर्नओवर वाली कम्पनी बन चुकी हैं।

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