तीन पर्यावरण प्रमियो के सूत्र - Inspirational Stories In Hindi | HindiApni
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तीन पर्यावरण प्रमियो के सूत्र – Inspirational Stories In Hindi

Success Stories of Indian Entrepreneurs in Hindi

Success Stories of Indian Entrepreneurs in Hindi
एक सफल उद्योगपति की कहानी

नोएडा के एक इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग करने के बाद पटना के आनंद सिंह, विजनौर के आदित्य सिंह और कनौज के रहने वाले सौरभ मिश्र बेंगलूर में इंडिया के टॉप सॉफ्टवेर कम्पनी में काम करने लगे थे। आनंद सिंह और आदित्य सिंह ‘एक्सेंचर’ में जॉब कर रहे थे। वही सौरभ मिश्र ‘इन्फोसिस’ में जॉब कर रहे थे। तीनो में एक खास बात थी की पढाई के साथ – साथ तीनो को पर्यावरण संरक्षण का जूनून एक जैसा था। तीनो पर्यावरण संरक्षण के लिए होने वाले कार्यक्रम में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते थे। इसी कार्यक्रम के जरिये तीनो एक दुसरे के अच्छे दोस्त बन गए थे। उसी समय महाराष्ट्र के विदर्भ में किसानो की आत्महत्या की संख्या बढ़ रही थी। यह समस्या तीनो को परेशान कर रही थी।

तीनो ने मिलकर एक सर्वे किया तो पता चला की जो किसान आत्महत्या कर रहे हैं। वह काफी छोटी जोत के थे। वह अपनी उपज बढ़ाने के लिए किट नाशक और खाद, उर्वरक के इस्तेमाल के लिए कर्ज में डूबते चले गए। और बाद में अपने इज्जत और आबरू के चक्कर में खुदखुशी कर लेते। वही दूसरी तरफ कुछ किसान विदर्भ में ही जैविक खेती के जरिये अपनी कपास की पैदवार बढाकर निर्यात कर अच्छी कमाई कर रहे थे। आदित्य, आनंद और सौरभ ने सोचा की क्यों नहीं विदर्भ के जैविक कपास के किसानो के लिए देश में ही बाज़ार बनाया जाए। उसके बाद तीनो ने नौकरी छोड़ दी और एक कम्पनी बनाई ग्रीन ऑर्गेनिक क्लॉदिंग प्राइवेट लिमटेड। जिसका ऑफिस उतर प्रदेश के गाज़ियाबाद के वैशाली में खोला गया। यह देश में जैकविक कपास से बने कपड़े की पहली कम्पनी थी।

सौरभ बाताते हैं की भारत में विश्व का सबसे ज्यादा ऑर्गेनिक कॉटन की पैदवार होती हैं। लेकिन यह सारा माल दुसरे देशो को भेज दिया जाता हैं। यह तीनो कहते हैं की जब हम अच्छा पैदवार कर सकते हैं तो अच्छा पहन क्यों नहीं सकते इसी सोंच को सामने रखकर तीनो ने इस क्षेत्र में काम करना शुरू किया। तब तीनो ने मिलकर ऑर्गेनिक कॉटन का बाज़ार तलाशना शुरू कर दिया। आदित्य बताते हैं की हमें पता था की कार्पोरेट कंपनिया खाश मोके पर अपने कर्मचरियों को तरह – तरह के तोहफे देती हैं जिनमे टी-शर्ट और शर्ट भी शामिल होते हैं। तो इन लोगो ने इन कम्पनियों से सम्पर्क करना शुरू किया। सफलता एक वर्ष बाद मिली जब 2013 में इंडिगो एयरलाइंस ने अपनी सातवीं वर्षगाठ के लिए ग्रीन ऑर्गेनिक क्लॉदिंग प्राइवेट लिमटेड को जैविक कपास की बनी 7,700 टी – शर्ट का आर्डर मिला।

राजलक्ष्मी कॉटन मिल जो कोलकाता में हैं। यह देश की ऑर्गेनिक कॉटन से बने कपड़े की सबसे बड़ी निर्यातक कम्पनी थी। इस कम्पनी के मालिक रजत जयपुरिया को देश में ही आपूर्ति करने के लिए एक तरह की डिजाइन वाली 7,700 टी – शर्ट बनाने के लिए राजी कर पाए। यह टर्निंग पॉइंट था। इसके बाद ग्रीन ऑर्गेनिक क्लॉदिंग प्राइवेट लिमटेड को गूगल, वेल्स फ़ार्गो बैंक, कैनन जैसी कम्पनियो के आर्डर मिलने शुरू हो गए।

ऑर्गेनिक क्लॉदिंग प्राइवेट लिमटेड एसजीपी के मानक पूरा करने वाली देश की पहली कम्पनी बनी आज यह कम्पनी कोको कोला को ऑर्गेनिक कॉटन से बने कपड़े सप्लाई करती हैं। आनंद बताते हैं की हमे पता चला की बांस के रेशे से बने धागे कीटाणुओं को नष्ट कर देते हैं। तब इन्होने चीन की एक कम्पनी से इस धागे को खरीदकर गुजरात की एक कम्पनी से मोज़े बनवाए। खुद सौरभ ने इस मोज़े को तीन महीने इस्तेमाल किया और देखा की गन्दा होने के वाबजूद इससे बदबू नहीं आ रही थी। तब इन लोगो ने इस मोज़े के लिए ‘स्मेल फ्री ब्राण्ड’ लांच किया।

आज हर महीने 30,000 जोड़े मोज़े देश के सभी बड़े स्कूल में भेजे जा रहे हैं। मोज़े के सफलता के बाद इस कम्पनी ने पंजाब की एक फक्ट्री से समझोता कर के बांस के धागे से बने तौलिया बाजार में उतारा। यह आम तौलियों से पतला होने के बावजूद उससे जयादा पानी सोखता हैं। इस खूबियों के कारण ऑर्गेनिक क्लॉदिंग प्राइवेट लिमटेड स्पा के क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़े ब्राण्ड सिक्स सेंसेज को बांस की सप्लाई करने वाली विश्व की अकेली कम्पनी हैं।

2012 में पांच लाख से शुरु हुई कम्पनी आज तीन करोड़ से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। कम्पनी का प्लान हैं की अगले पांच वर्षो में 100 करोड़ से अधिक का सालाना कारोबार वाली कम्पनी बनाना हैं।

आज इनके प्रोडक्ट को सभी ऑनलाइन कम्पनियां बेंच रही हैं। आज इनका गाज़ियाबाद और नोएडा की कम्पनियों से प्रोडक्शन शुरु हो गया हैं। अब इनका अगला लक्ष्य एक वर्ष के भीतर विश्व के सभी जगह बांस से बने कपड़े और ऑर्गेनिक कॉटन से बने कपड़े को पहुचाना हैं।

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